न्यायिक कार्य से संबंधित परिषद के महत्वपूर्ण निर्णय एवं विधि व्यवस्थाएं
क्रमांक विषय संदर्भित वाद निर्णय दिनांक
1 हिन्दू अविभाजित परिवार की परिसम्पत्तियों का हस्तान्तरण कर्ता की वसीयत के आधार पर नही किया जाना। निगरानी संख्या - 2683/2016/मुरादाबाद, कम्प्यूटरीकृत वाद संख्या आर 20161354002683, देवेन्द्र कमार शर्मा आदि बनाम मैसर्स आर0डी0 रामनाथ कम्पनी देहली आदि, अन्तर्गत धारा : 219, अधिनियम :उ0प्र0भू0राजस्व अधिनियम, 1901

09.08.2018
निर्धारित अवधि के उपरान्त असंक्रमणीय भूमिधर को संक्रमणीय भूमिधर के अधिकार प्राप्त करने के संबंध में। रिव्यु संख्या-3031/2014,सीतापुर,(कम्प्यूटरीकृत वाद संख्या- R201410664003031) राम कुमार आदि बनाम बिहारी 03.05.2018
3 निम्नलिखित बिंदुओं के सम्बन्ध में महत्वपूर्ण विधि व्यवस्था:
(i) क्या असंक्रमणीय भूमिधरी पट्टे के निरस्तीकरण /समापन हेतु अपनायी जाने वाली प्रक्रिया एक समान होगी अथवा भिन्न।
(ii) क्या उ0प्र0 ज0वि0 एवं भूमि व्यवस्था अधिनियम 1950 की धारा-132 की भूमि पर कभी भी किसी आसामी प पट्टेदार अथाव अन्य व्यक्ति के भूमिधरी अधिकार सृजित हो सकते है अथवा नहीं। यदि ऐसी भूमि पर भूमिधरी अधिकार कभी सृजित ही नहीं हो सकते तो क्या ऐसे व्यक्ति को हितबद्ध पक्षकार माना जा सकता है अथवा नहीं।
(iii) क्या प्राकृतिक न्याय के सिद्धानें के क्रम में केवल हिबद्ध पक्षकारों को सुनवाई का अवसर दिया जाना अनिवार्य है अथवा ऐसे पक्षकारों को भी सुना जाना अनिवार्य है निका प्रश्नगत भूमि में कभी स्थई स्वत्व/हित सृजित ही नहीं हो सकता व जिनका अस्थाई हित पट्टेे की समयावधि पूर्ण हो जाने के उपरान्त समाप्त हो चुका है।
(iv) क्या आसामी पट्टेेदार के पट्टेे की अवधि समाप्त हो जाने के उपरान्त उसकी हैसियत अतिक्रमणकर्ता की होगी और यदि हां तो उसकी भूमि से बेदखली की प्रक्रिया क्या होगी।
निगरानी संख्या- 2126/2016, मुरादाबाद, (कम्प्यूटरीकृत वाद संख्या- R20161354002126) पंकज सरीन आदि बनाम उपजिलाधिकारी बिलारी आदि 29.01.2018
4 एक बार राजस्व परिषद् का स्तर एग्जॉस्ट (exhaust) हो जाने के बाद पुनः राजस्व परिषद् स्तर पर ही पुनर्स्थापन (Restoration) करा कर वाद की नए सिरे से सुनवाई (Re-hearing) नहीं किये जाने के सम्बन्ध में| रिव्यु संख्या-336/2017,फिरोजाबाद,(कम्प्यूटरीकृत वाद संख्या- R2017012600336) उत्तर प्रदेश सरकार आदि बनाम अवधेश कुमार 19.01.2018
5 प्रशासनिक पत्राचार के विरूद्ध तथा काल बाधित होने पर राजस्व न्यायालय में निगरानी पोषणीय नहीं होने तथा उ0प्र0ज0वि0 एवं भूमि व्यवस्था अधि0 की धारा 143 के अंतर्गत अकृषक(आबादी) घोषित हो जाने के उपरान्त भूमि से संबंधित वाद की सुनवाई राजस्व न्यायालय द्वारा नहीं किये जाने के संबंध में। निगरानी संख्या-1241/2017, कानपुरनगर,(कम्प्यूटरीकृत वाद संख्या- R20170341001241) कानपुर विकास प्राधिकरण बनाम उ0प्र0 सरकार द्वारा जिलाधिकारी कानपुर नगर 17.10.2017
6 उ0प्र0 भू राजस्व अधिनियम-1901 की धारा 33/39 व राजस्व संहिता अधिनियम-2006 की धारा 32/38 के अंतर्गत अभिलेखों का शुद्धीकरण समयबद्ध ढंग से किये जाने के संबंध में। निगरानी संख्या-285/2016, मुरादाबाद (कम्प्यूटरीकृत वाद संख्या-2016135400285) श्रीमती जसवीर कौर आदि बनाम श्रीमती इसरार जहाँ आदि 05.10.2017
7 राजस्व वादों के निस्तारण में मौखिक बहस की अनिवार्यता तथा वाद के एकपक्षीय (Ex Parte) होने, उनके पुनर्स्थापना (Restoration) वापसी (Recall) व पुनर्विलोकन (Review) के संबंध में। निगरानी संख्या-2384/2015, उन्नाव (कम्प्यूटरीकृत वाद संख्या-R20151069002384) रमेश चन्द्र आदि बनाम राकेश कुमार। 26.09.2017
8 उ0प्र0 भू राजस्व अधिनियम-1901 की धारा-220 के अंतर्गत पुनर्विचार करने का अधिकार राजस्व परिषद में ही निहित होने तथा राजस्व परिषद के अतिरिक्त किसी राजस्व न्यायालय को पुनर्विचार का अधिकार प्राप्त नहीं होने के संबंध में। निगरानी संख्या-352/2015, उन्नाव (कम्प्यूटरीकृत वाद संख्या-R2015106900352) राकेश कुमार बनाम शशि बाला आदि। 19.09.2017  
9 किसी वाद में पक्षकार की हित बद्धता व उसके Locus Standi का निर्धारण किये जाने के संबंध में। निगरानी संख्या-530/2017, कानपुर नगर (कम्प्यूटरीकृत वाद संख्या-R2017034100530) सुधीर कुमार आदि बनाम भानु केहर। 30.08.2017
10 उ0प्र0 भू राजस्व अधिनियम-1901 की धारा-220 के अंतर्गत पुनर्विचार करने का अधिकार राजस्व परिषद में ही निहित होने तथा राजस्व परिषद के अतिरिक्त किसी राजस्व न्यायालय को पुनर्विचार का अधिकार प्राप्त नहीं होने के संबंध में। निगरानी संख्या-165/2017, सुलतानपुर (कम्प्यूटरीकृत वाद संख्या-R2017046800165) अनारादेवी बनाम रामपति। 07.09.2017
11 किन्ही प्रचलित परम्पराओं /आयोजनों आदि के आधार पर सामुदायिक सम्पत्ति का राजस्व अभिलेखों में किसी संस्था के पक्ष में प्रविष्टि किये जाने का कोई विधिक आधार नहीं होने के संबंध में। निगरानी संख्या- 2029 / 2014, मुरादाबाद, खलील अहमद बनाम उ0प्र0 सरकार। 25.04.2017
12 राजस्व न्यायालयों में योजित पुनर्स्थापना (Restoration), पुनर्विचार (Review) द्वितीय निगरानी (Second Revision) के ग्राह्यता/निस्तारण के संबंध में। निगरानी संख्या & 2555 / 2014-15, मुरादाबाद, श्रीमती पार्वती बनाम चमोलिया आदि। 30.03.2017